पंजाब विश्वविद्यालय के एक अध्ययन के अनुसार पंजाब में महिला किसानों की हालत भयावह है क्योंकि उनमें से 94 फीसदी महिलाएं भारी कों में डूबी हुई हैं। यहां पर कृषि की हालत ठीक नहीं है और खासतौर पर महिला खेतिहरों के साथ बराबरी का व्यवहार नहीं किया जाता। महिलाओं को पुरुषों से कम मजदूरी दी जाती है जबकि काम ज्यादा लिया जाता है। इस रिपोर्ट के बाद पंजाब सरकार को चाहिए कि वह गरीब महिला किसानों को समस्याओं से मुक्ति दिलाने वाली नीति बनाए। दरअसल, महिलाओं के ऊपर पूरे घर के कामों का बोझ है, उसके बाद कृषि के कामों को भी निपटाना होता है।?एक बंधुआ मजदूर की तरह काम करने के बाद उन्हें सालभर में मात्र 77,198 रुपये प्राप्त होते हैं और जिसमें से कि लगभग 53,916 रुपये उनके कर्ज उतारने में चला जाता है, उनके पास सिर्फ 20 प्रतिशत की कमाई ही बचती है। पैतृक व्यवस्था होने की वजह से सिर्फ 13 प्रतिशत महिलाओं के पास अपनी जमीन है। जिन संस्थाओं से उन्होंने कर्ज लिएहुए हैं वे घपला करके उन ऋणों को बढ़ाते ही रहती हैं, जिससे उन्हें कर्ज से मुक्ति नहीं मिल पातीउनमें से अधिकतर महिलाएं अनपढ़ हैं, वे सुबह से शाम तक भूखे पेट काम करती रहती हैं। दरअसल, उन्हें यह नहीं मालूम है कि काम करने के कुछ निश्चित घंटे भी होते हैं और मजदूरी की कीमत सरकार की तरफ से तय है। इससे उनके स्वास्थ्य के साथ ही परिवार की जिंदगी पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है। ऑक्सफैम 2017 की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 40 फीसदी महिलाएं अपनी रोजी-रोटी के लिए खेतों में मजदूरों की तरह काम करने के लिए मजबूर हैंपुरुषों के काम के लिए शहरों की तरफ जाने से महिला मजदूरों की संख्या बढ़ती जा रही है।सरकार ने 16 अक्तूबर को महिला किसान दिवस के रूप में घोषित किया है परंतु उनको वास्तव में बेहतर मजदूरी और साथ ही अन्य सुविधाओंकी आवश्यकता है। उनको फसल काटने, पैसोंका हिसाब-किताब रखने की ट्रेनिंग देने की आवश्यकता है, जिससे कि उनके स्वाभिमान की सुरक्षा हो सके
बदहाल महिला किसान